इनमें बेंगलुरु से 16 फर्जी डॉक्टरों की पहचान की गई है, जबकि सबसे अधिक 127 फर्जी डॉक्टरों की पहचान कलबुर्गी में हुई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर ने हाल में विधानसभा सत्र के दौरान यह जानकारी दी। आंकड़ों के मुताबिक, कलबुर्गी के बाद रायचूर में 124, धारवाड़ में 75 और कोलार में 31 फर्जी डॉक्टरों की पहचान हुई। विजयपुरा में 24, बल्लारी में 23, दक्षिण कन्नड़ में 20 और चिक्कबल्लापुर में 17 मामले सामने आए। बेंगलुरु अर्बन 16 मामलों के साथ सूची में नौवें स्थान पर है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोप्पल में 14, हावेरी में 13, बीदर और बागलकोट में 12-12, हासन में 11 तथा विजयनगर में 10 मामले मिले। मैसूर में आठ, बेलगावी में सात, चामराजनगर में छह और दावणगेरे में पांच, चित्रदुर्ग दो और रामनगर में दो फर्जी डॉक्टरों की पहचान हुई।
नवंबर 2025 में जारी हुआ था सर्कुलर
बेंगलुरु मिरर के अनुसार, फर्जी डॉक्टरों पर शिकंजा कसने के लिए कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 2025 में एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें फर्जी डॉक्टरों और ऐसे लोगों को नियुक्त करने वाले चिकित्सा प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
25 हजार रुपये तक जुर्माना
राज्य सरकार के अनुसार, यदि कोई पहली बार इस तरह के मामले में पकड़ा जाता है तो उसपर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी बार अपराध करने पर 2.5 लाख रुपये तक जुर्माना और एक साल तक की जेल हो सकती है। इसके बाद अपराध दोहराने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
जिलों में बनाई गई विशेष टास्क फोर्स
सरकार ने फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, आयुष समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें अपंजीकृत चिकित्सकों की जांच, उनके खिलाफ अभियोजन शुरू करने और हर महीने सरकार को रिपोर्ट भेजने का काम करती हैं।



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