टेलीकॉम सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को लेकर TRAI के चेयरमैन लाहोटी ने कहा है कि दूरसंचार कंपनियों और टेक्नोलॉजी फर्मों को AI के इस्तेमाल के साथ-साथ उससे जुड़े संभावित जोखिमों पर भी गंभीरता से काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को Responsible AI के लिए निवेश बढ़ाने, संभावित जोखिमों का आकलन करने, AI से लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों का रिकॉर्ड रखने और किसी मॉडल को वास्तविक इस्तेमाल में लाने से पहले उसका पर्याप्त परीक्षण करने की जरूरत है। खासतौर पर ऐसे AI सिस्टम जिनका लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है, उनमें मानवीय निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा।
लाहोटी के मुताबिक AI टेलीकॉम क्षेत्र के लिए बड़े अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ प्रभावी सुरक्षा उपाय और उचित नियामकीय व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन का उद्देश्य केवल काम को मशीनों के हवाले करना नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे जवाबदेही प्रभावित किए बिना सेवाओं और परिणामों में सुधार होना चाहिए।
ज्यादा स्वायत्त होंगे नेटवर्क, लेकिन इंसानों की भूमिका रहेगी अहम
लाहोटी ने कहा कि भविष्य में टेलीकॉम नेटवर्क पहले की तुलना में अधिक स्वायत्त और बुद्धिमान हो सकते हैं। इसके बावजूद मानवीय निगरानी, ऑडिट की सुविधा और जरूरत पड़ने पर सिस्टम में इंसानी हस्तक्षेप की क्षमता को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने उद्योग संगठन COAI के एक कार्यक्रम में 'Powering India's Intelligent Connectivity Future' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को ऐसी कनेक्टिविटी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ हो, नवाचार को बढ़ावा मिले और डिजिटल सेवाओं का फायदा हर नागरिक तक पहुंचे।
नेटवर्क मैनेजमेंट में AI से तेजी
TRAI चेयरमैन के अनुसार AI का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही कई क्षेत्रों में कर रही हैं। इसके जरिए नेटवर्क में मांग का अनुमान लगाने, उपलब्ध संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने, तकनीकी समस्याओं को जल्दी पहचानने और मांग में होने वाले बदलावों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल रही है।
इससे टेलीकॉम नेटवर्क पारंपरिक ऑटोमेशन से आगे बढ़कर ज्यादा ऑटोनॉमस सिस्टम की ओर जा रहे हैं। हालांकि, लाहोटी ने यह भी स्पष्ट किया कि AI पर बढ़ती निर्भरता अपने साथ नए तरह के जोखिम लेकर आती है, जिनके लिए टेलीकॉम कंपनियों और नियामकों को पहले से तैयारी करनी होगी।
AI के गलत फैसलों से निपटने की भी हो तैयारी
लाहोटी ने कहा कि AI आधारित सिस्टम को इस तरह तैयार करना जरूरी है कि अगर कोई स्वचालित निर्णय गलत साबित हो तो उसे संभाला जा सके। इसके लिए यह भी जांचना होगा कि किसी गलत फैसले को कितनी जल्दी वापस लिया जा सकता है और यदि AI पर निर्भर कोई सिस्टम उपलब्ध न रहे, तो क्या जरूरी टेलीकॉम सेवाएं फिर भी जारी रखी जा सकती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि नेटवर्क को अधिक बुद्धिमान बनाने की कोशिश में ऐसा नहीं होना चाहिए कि AI खुद नेटवर्क की विफलता का कोई नया Single Point of Failure बन जाए।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं का भरोसा केवल अच्छी तकनीक से नहीं बनता। इसके लिए सेवाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता, सुरक्षा, निष्पक्ष व्यवहार और समस्या आने पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी जरूरी है।
ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में AI मददगार भी, चुनौती भी
TRAI चेयरमैन ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर घोटालों के मामले में AI की दोहरी भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि AI संदिग्ध गतिविधियों और संभावित खतरों की पहचान करके डिजिटल सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती है।
वहीं, AI का गलत इस्तेमाल होने पर धोखाधड़ी करने वाले लोग अपनी गतिविधियों को और ज्यादा जटिल बना सकते हैं। इसलिए AI के फायदे के साथ इसके दुरुपयोग से जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रखना होगा।
बहुभाषी AI से उपभोक्ता सुरक्षा को मिल सकता है बढ़ावा
लाहोटी ने AI आधारित बहुभाषी और वॉयस असिस्टेंस सिस्टम को भी उपभोक्ता संरक्षण के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति संदिग्ध बातचीत या धोखाधड़ी वाली स्थिति का सामना करता है, तो AI सिस्टम बातचीत के संदर्भ को समझकर उसी समय उचित चेतावनी दे सकते हैं।
भारत जैसे भाषाई रूप से विविध देश में ऐसी तकनीक खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इससे अलग-अलग भाषाओं में लोगों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी और चेतावनी पहुंचाना आसान होगा।
लाहोटी ने कहा कि भारत का अगला डिजिटल बदलाव सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि देश में कितने लोग डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। असली सफलता इस बात से तय होगी कि नागरिकों को कितनी बुद्धिमान, सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार डिजिटल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है।


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